झुक के मिलना मेरी आदत नहीं मजबूरी है मैं ने अहबाब के एहसान उठाए हुए हैं
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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बहुत बनाएँगे लेकिन कभी नहीं बनेगी पुरानी चीज़ दोबारा नई नहीं बनेगी वो झुर्रियाँ तो बना लेंगे मेरे चेहरे की मुसव्विरों से मेरी बेबसी नहीं बनेगी
Sarwar Khan Sarwar
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इक निशानी भी फ़रामोश नहीं की उस की एक भी ज़ख़्म को आराम नहीं आने दिया
Sarwar Khan Sarwar
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हम वो महरूम-ए-तमन्ना कि भरी दुनिया में अपने हिस्से की मुहब्बत भी नहीं कर पाए
Sarwar Khan Sarwar
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तू ने इक दिन हमें नाकाम कहा और हम ने ख़ुद को अपने भी किसी काम नहीं आने दिया
Sarwar Khan Sarwar
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जो मेरा दुख है वही सारे जहाँ का दुख है दिल कहीं और लगा हो गई शादी कहीं और
Sarwar Khan Sarwar
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