sherKuch Alfaaz

हँसी से पड़ती थी जो शक्ल पर वो सिलवटें कभी वो सिलवटें तो आज रह गई हँसी कहाँ गई

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मैं उस से ये तो नहीं कह रहा जुदा न करे मगर वो कर नहीं सकता तो फिर कहा न करे वो जैसे छोड़ गया था मुझे उसे भी कभी ख़ुदा करे कि कोई छोड़ दे ख़ुदा न करे

Tehzeeb Hafi

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दिल्ली से हम ही बोला करें अम्न की बोली यारो तुम भी कभी लाहौर से बोलो

Rahat Indori

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कौन सी बात कहाँ कैसे कही जाती है ये सलीक़ा हो तो हर बात सुनी जाती है एक बिगड़ी हुई औलाद भला क्या जाने कैसे माँ-बाप के होंठों से हँसी जाती है

Waseem Barelvi

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वाक़िफ़ कहाँ ज़माना हमारी उड़ान से वो और थे जो हार गए आसमान से

Faheem Jogapuri

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मत पूछो कितना ग़मगीं हूँ गंगा जी और जमुना जी ज़्यादा तुम को याद नहीं हूँ गंगा जी और जमुना जी अमरोहे में बान नदी के पास जो लड़का रहता था अब वो कहाँ है मैं तो वहीं हूँ गंगा जी और जमुना जी

Jaun Elia

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