हँसने को तो दुनिया कम पड़ जाती है रोने को इक कंधा काफ़ी होता है
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तुम्हें इक मश्वरा दूँ सादगी से कह दो दिल की बात बहुत तैयारियाँ करने में गाड़ी छूट जाती है
Zubair Ali Tabish
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मेरी दुनिया उजड़ गई इस में तुम इसे हादसा समझते हो आख़िरी रास्ता तो बाक़ी है आख़िरी रास्ता समझते हो
Himanshi babra KATIB
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कितना महफ़ूज़ हूँ मैं कोने में कोई अड़चन नहीं है रोने में मैं ने उस को बचा लिया वरना डूब जाता मुझे डुबोने में
Fahmi Badayuni
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ज़िंदगी भर के लिए दिल पे निशानी पड़ जाए बात ऐसी न लिखो, लिख के मिटानी पड़ जाए
Aadil Rasheed
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मुझे बातें नहीं तेरी मोहब्बत चाहिए थी मुझे अफ़सोस है ये मुझ को कहना पड़ रहा है
Ali Zaryoun
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पूरी नहीं हो पाती है कोई ग़ज़ल मिरी मैं नाम तेरा लिखके क़लम तोड़ देता हूँ
Paras Angral
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मैं इसी सम्त ही तो बैठा हूँ तेरी जिस सम्त वापसी होगी
Paras Angral
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जब कोई देख न पाएगा मुझे दुनिया में तेरी आँखों में दिखूँगा कोई जब देखेगा
Paras Angral
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गर न मेरी आँखें होती क्या मुझे फिर पैसा दिखता
Paras Angral
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बात करता हूँ कभी आवाज़ देता हूँ अपने ख़्वाबों को नई परवाज़ देता हूँ
Paras Angral
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