बात करता हूँ कभी आवाज़ देता हूँ अपने ख़्वाबों को नई परवाज़ देता हूँ
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बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं प्यार अकेला जी लेता है दोस्त अकेले मर जाते हैं
Kumar Vishwas
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तुम्हें इक मश्वरा दूँ सादगी से कह दो दिल की बात बहुत तैयारियाँ करने में गाड़ी छूट जाती है
Zubair Ali Tabish
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तुम पूछो और मैं न बताऊँ ऐसे तो हालात नहीं एक ज़रा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं
Qateel Shifai
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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पूरी नहीं हो पाती है कोई ग़ज़ल मिरी मैं नाम तेरा लिखके क़लम तोड़ देता हूँ
Paras Angral
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जब कोई देख न पाएगा मुझे दुनिया में तेरी आँखों में दिखूँगा कोई जब देखेगा
Paras Angral
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मैं इसी सम्त ही तो बैठा हूँ तेरी जिस सम्त वापसी होगी
Paras Angral
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फ़ज़्ल या मौला ऐसा करो बंदे को फिर से बंदा करो
Paras Angral
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हँसने को तो दुनिया कम पड़ जाती है रोने को इक कंधा काफ़ी होता है
Paras Angral
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