हर दम नज़र के सामने रक्खे हैं मैं ने दोस्त ख़ंजर निकाल ले ना कहीं पीठ करते ही
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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वो लड़ कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस से मोहब्बत एक तरफ़ है उस से झगड़ा एक तरफ़
Varun Anand
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जो सारे ज़ख़्म मेरे भर दिया करता उसी के नाम का ख़ंजर बनाया है
Parul Singh "Noor"
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हुआ टुकड़े वहम जब ये कहा उस ने तुम्हीं सब कुछ हो लेकिन मेरा इश्क़ नहीं
Parul Singh "Noor"
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रोज़ ढक लेती थी नीला जिस्म अपना शुक्र है आ गई बाहर घर की बातें
Parul Singh "Noor"
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सभी रिश्तें मैं यूँँ बचाए हूँ जैसे तड़पते दियों को हवा देते रहना
Parul Singh "Noor"
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आसमाँ से गरज छेड़ती है हमें एक बारिश में भी भीगे थे साथ हम
Parul Singh "Noor"
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