हर्फ़-ए-आख़िर है अगर तो रहने दीजे इब्तिदास इंतिहा तक का सफ़र है
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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वो नहीं मेरा मगर उस से मोहब्बत है तो है ये अगर रस्मों रिवाजों से बग़ावत है तो है
Deepti Mishra
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दुख अपना अगर हम को बताना नहीं आता तुम को भी तो अंदाज़ा लगाना नहीं आता
Waseem Barelvi
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हम किसी को राह में कुछ देर भी तक लें अगर पागलों को जो मिले तो सब के सब पागल मिले
nakul kumar
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प्यास अगर मेरी बुझा दे तो मैं जानू वरना तू समुंदर है तो होगा मेरे किस काम का है
Rahat Indori
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इक आस रखी थी हम ने भी इक ख़्वाब मिला जो टूटा था जो नाम पुकारा था उस ने वो नाम हमारा झूठा था
Saniya Tasnim
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पूरे दिन बस ये हूँ हल्ला कब चुप होगा ये मुहल्ला
Saniya Tasnim
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उसी के हैं दिन रात सारे हमें जो मुयस्सर नहीं है
Saniya Tasnim
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पर्दा रखती है रिश्ते का इज़्ज़त वो ही अस्तर है
Saniya Tasnim
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सबने आसानी चुनी हम ने आज़ादी चुनी
Saniya Tasnim
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