पर्दा रखती है रिश्ते का इज़्ज़त वो ही अस्तर है
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ख़ुदा, फ़रिश्ते, पयम्बर, बशर किसी का नहीं मुझे लिहाज़ तो सबका है डर किसी का नहीं
Charagh Sharma
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वक़्त, वफ़ा, हक़, आँसू, शिकवे जाने क्या क्या माँग रहे थे एक सहूलत के रिश्ते से हम ही ज़्यादा माँग रहे थे उस की आँखें उस की बातें उस के लब वो चेहरा उस का हम उस की हर एक अदास अपना हिस्सा माँग रहे थे
Shikha Pachouly
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चादर की इज़्ज़त करता हूँ और पर्दे को मानता हूँ हर पर्दा पर्दा नइँ होता इतना मैं भी जानता हूँ
Ali Zaryoun
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दीवारें छोटी होती थीं लेकिन पर्दा होता था तालों की ईजाद से पहले सिर्फ़ भरोसा होता था
Azhar Faragh
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दिल से जो बात निकलती है असर रखती है पर नहीं ताक़त-ए-परवाज़ मगर रखती है
Allama Iqbal
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पूरे दिन बस ये हूँ हल्ला कब चुप होगा ये मुहल्ला
Saniya Tasnim
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किसी को ख़ामोश कर पाऊँ कहाँ ऐसा शोर है मुझ में
Saniya Tasnim
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इश्क़ होगा फिर भला होगा मैं न कहता था बुरा होगा
Saniya Tasnim
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उसी के हैं दिन रात सारे हमें जो मुयस्सर नहीं है
Saniya Tasnim
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इक आस रखी थी हम ने भी इक ख़्वाब मिला जो टूटा था जो नाम पुकारा था उस ने वो नाम हमारा झूठा था
Saniya Tasnim
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