किसी को ख़ामोश कर पाऊँ कहाँ ऐसा शोर है मुझ में
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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लोग सुन कर वाह-वाही करते हैं हर बार ही रोज़ ही रोता हूँ अब तो मैं किसी सुर-ताल में
nakul kumar
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कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़ किसी की आँख में हम को भी इंतिज़ार दिखे
Gulzar
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सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
Khwaja Meer Dard
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पूरे दिन बस ये हूँ हल्ला कब चुप होगा ये मुहल्ला
Saniya Tasnim
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मैं हटा दीन दुनिया से तो यूँँ हुआ बंदगी भी गई ज़िन्दगी भी गई
Saniya Tasnim
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पर्दा रखती है रिश्ते का इज़्ज़त वो ही अस्तर है
Saniya Tasnim
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उसी के हैं दिन रात सारे हमें जो मुयस्सर नहीं है
Saniya Tasnim
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आँखों के जो अंदर है आख़िर किस का वो घर है
Saniya Tasnim
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