हिन्दी महक रही है लोबान जैसी मेरी लहजे को मैं ने अपने उर्दू किया हुआ है
sherKuch Alfaaz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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मेरी बरसों की उदासी का सिला कुछ तो मिले उस से कह दो वो मेरा क़र्ज़ चुकाने आए
Khalil Ur Rehman Qamar
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कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी यूँँ कोई बे-वफ़ा नहीं होता
Bashir Badr
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जा तुझे जाने दिया जानाँ मेरी जानाँ जान अब तू हो गई अनजान हो जैसे
nakul kumar
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अब उस की शादी का क़िस्सा न छेड़ो बस इतना कह दो कैसी लग रही थी
Zubair Ali Tabish
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