हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त 'ग़ालिब' नाम हम ने कभी गुलज़ार नहीं रक्खा है मेरे बच्चे भी मुहब्बत में वफ़ा करते हैं मैं ने घर में कभी हथियार नहीं रक्खा है
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मैं चाहता हूँ मोहब्बत मेरा वो हाल करे कि ख़्वाब में भी दोबारा कभी मजाल न हो
Jawwad Sheikh
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अब लगता है ठीक कहा था 'ग़ालिब' ने बढ़ते बढ़ते दर्द दवा हो जाता है
Madan Mohan Danish
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वो जिस पर उस की रहमत हो वो दौलत माँगता है क्या मोहब्बत करने वाला दिल मोहब्बत माँगते है क्या तुम्हारा दिल कहे जब भी उजाला बन के आ जाना कभी उगता हुआ सूरज इजाज़त माँगता है क्या
Ankita Singh
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बिठा दिया है सिपाही के दिल में डर उस ने तलाशी दी है दुपट्टा उतार कर उस ने मैं इस लिए भी उसे ख़ुद-कुशी से रोकता हूँ लिखा हुआ है मेरा नाम जिस्म पर उस ने
Zia Mazkoor
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तुम्हारे पाँव क़सम से बहुत ही प्यारे हैं ख़ुदा करे मेरे बच्चों की इन में जन्नत हो
Rafi Raza
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शे'र मेरा सुन के अहल-ए-बज़्म तो ख़ामोश थी मेरे आगे लिखने वाले तब्सिरा करते रहे
Rakesh Mahadiuree
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हर ख़राब चीज़ में भी ठीक चीज़ है दुनिया भी हसीन है ये दिलरुबा के साथ
Rakesh Mahadiuree
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वो लड़का सूर्य था अपने समय का मुहब्बत खा गई फ़नकार साईं
Rakesh Mahadiuree
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जानवर को जानवर से उतनी भी नफ़रत नहीं आदमी को आदमी से जितनी नफ़रत हो गई
Rakesh Mahadiuree
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ग़ज़ल कहता हूँ और बारूद पे सिगरेट पीता हूँ अगर भूचाल भी आ जाए तो मैं डर नहीं सकता
Rakesh Mahadiuree
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