इक आँख सुकूँ है इक आँख आँसू है फ़लक पर चाँद भी और सूरज भी
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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तूफ़ानों से आँख मिलाओ सैलाबों पे वार करो मल्लाहों का चक्कर छोड़ो तैर के दरिया पार करो
Rahat Indori
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तुम्हारी आँखों की तौहीन है ज़रा सोचो तुम्हारा चाहने वाला शराब पीता है
Munawwar Rana
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तेरी आँखों में जो इक क़तरा छुपा है, मैं हूँ जिस ने छुप छुप के तेरा दर्द सहा है, मैं हूँ एक पत्थर कि जिसे आँच न आई, तू है एक आईना कि जो टूट चुका है, मैं हूँ
Fauziya Rabab
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भीगीं पलकें देख कर तू क्यूँँ रुका है ख़ुश हूँ मैं वो तो मेरी आँख में कुछ आ गया है ख़ुश हूँ मैं वो किसी के साथ ख़ुश था कितने दुख की बात थी अब मेरे पहलू में आ कर रो रहा है ख़ुश हूँ मैं
Zubair Ali Tabish
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उस शहर-ए-नाकाम के बाशिंदे हैं हम जहाँ मिल कर के मुर्दे सभी ज़िंदा को दफ़नाते हैं
Chetan Verma
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मक़ाम-ए-क़ैस के साथ अवाम-ए-तैश के साथ मैं निकला उस के दर से बड़ी ही ऐश के साथ
Chetan Verma
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इस आसमाँ के ही सबब हम से हुई है हर ख़ता इस ने दिखाए ख़्वाब जैसे जानता कोई नहीं
Chetan Verma
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तू भी ग़म-ए-हयात का है मारा और मैं भी चल इश्क़ छोड़ दर्द का रिश्ता बनाते हैं
Chetan Verma
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रूह को गाँव की दहलीज़ पे रख कर इक बदन गया है शहर कमाने
Chetan Verma
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