sherKuch Alfaaz

इस क़दर सख़्त ज़ालिम थी उस की नज़र सारे तावीज़ ओ दम बे-असर ही रहे

Related Sher

अब मैं सारे जहाँ में हूँ बदनाम अब भी तुम मुझ को जानती हो क्या

Jaun Elia

197 likes

माँग सिन्दूर भरी हाथ हिनाई कर के रूप जोबन का ज़रा और निखर आएगा जिस के होने से मेरी रात है रौशन रौशन चाँद में आज वही अक्स नज़र आएगा

Azhar Iqbal

67 likes

ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम

Sahir Ludhianvi

174 likes

दर्द ऐसा नज़र-अंदाज़ नहीं कर सकते जब्त ऐसा की हम आवाज नहीं कर सकते बात तो तब थी कि तू छोड़ के जाता ही नहीं अब तेरे मिलने पे हम नाज नहीं कर सकते

Ismail Raaz

64 likes

कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है

Jawwad Sheikh

163 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Wajid Husain Sahil.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Wajid Husain Sahil's sher.