इश्क़ कोई हवस का खेल नहीं या'नी बस दस्तरस का खेल नहीं ज़िंदगी तो बहुत ही अच्छी है हाँ मगर अपने बस का खेल नहीं
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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हज़ार इश्क़ करो लेकिन इतना ध्यान रहे कि तुम को पहली मोहब्बत की बद-दुआ न लगे
Abbas Tabish
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यूँँ जो तकता है आसमान को तू कोई रहता है आसमान में क्या
Jaun Elia
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उस लड़की के जाने से बस ये बदला प्यारी-प्यारी ग़ज़लें होना छूट गई
Shaad Imran
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अब्र जब भी गुज़रते हैं गली से रंग चुरा लेते है तेरी ओढ़नी से
Shaad Imran
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तुम ने बस बाज़ार में जलवे देखे हैं हम ने भीड़ में खोते बच्चे देखे हैं
Shaad Imran
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मेरे हाथों में अपना हाथ रख कर कहा उस ने कभी ये हाथ तो न छोड़ोगे
Shaad Imran
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कुछ चीज़ें तन्हा अच्छी हैं जैसे चाँद, ख़ुदा और मैं
Shaad Imran
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