इतना समझौता कर के क्या जीना है जीने को मरने का नाम दिया जाए
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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तू जो हर रोज़ नए हुस्न पे मर जाता है तू बताएगा मुझे इश्क़ है क्या जाने दे
Ali Zaryoun
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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तिरा ज़माना मुझ को करता है बदनाम ख़ुदा लगता है तू भी इन की साजिश में शामिल है
Shivangi Shivi
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महशर का दिन आया है अब तो कर्मा बोलेगा
Shivangi Shivi
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नाम तुम्हारा लेते हैं जो काम हमारा हो जाता है
Shivangi Shivi
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कभी तन्हा कभी रुसवा कभी बेचैन होते हैं मिरी पलकों तले देखो तुम्हारे नैन सोते हैं
Shivangi Shivi
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कितनी भी दिलकश बातें हों चेहरा चेहरा सब मालूम है
Shivangi Shivi
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