कभी तन्हा कभी रुसवा कभी बेचैन होते हैं मिरी पलकों तले देखो तुम्हारे नैन सोते हैं
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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मंज़िलें क्या हैं, रास्ता क्या है हौसला हो तो फ़ासला क्या है
Aalok Shrivastav
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तन्हाई सी शा में हैं ख़ामोशी दे जाती हैं
Shivangi Shivi
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सूरज कस के जलता है पत्थर रोज़ पिघलता है सूख गया दरिया सारा मौसम रोज़ बदलता है
Shivangi Shivi
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सूरज धूप लिए फिरता है रोज़ ज़मीं पर ये गिरता है करने शोर मिरे घावों पे ये बादल मुझ पर घिरता है
Shivangi Shivi
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मैं देख लूँ उसे जी भर के कल ये नज़र न रह जाएगी
Shivangi Shivi
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महशर का दिन आया है अब तो कर्मा बोलेगा
Shivangi Shivi
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