जब सर-ए-शाम पजीराई-ए-फ़न होती है शाहज़ादी को कनीज़ों से जलन होती है ले तो आया हूँ तुझे घेर के अपनी जानिब आगे इंसान की अपनी भी लगन होती है
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शाख़-दर-शाख़ होती है ज़ख़्मी जब परिंदा शिकार होता है
Indira Varma
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तब हम दोनों वक़्त चुरा कर लाते थे अब मिलते हैं जब भी फ़ुर्सत होती है
Javed Akhtar
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ट्यूशन में इक ऐसी लड़की होती है जिस की कॉपी सब को लेनी होती है
Dhaval Solanki
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नए दीवानों को देखें तो ख़ुशी होती है हम भी ऐसे ही थे जब आए थे वीराने में
Ahmad Mushtaq
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तुम नहीं उतरोगी मैं उतरूँगा गहराई में पगड़ी बड़ी होती है दुपट्टे से लंबाई में
Muzdum Khan
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मेरे बस में नहीं इलाज उस का ज़ख़्म देखा है मैं ने आज उस का जितना आगे का आदमी है वो रद न कर दे उसे समाज उस का
Azhar Faragh
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न भी चमके तो कोई बात नहीं तू तो वैसे ही सितारा है मुझे
Azhar Faragh
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उसे कहो जो बुलाता है गहरे पानी में किनारे से बँधी कश्ती का मसअला समझे
Azhar Faragh
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ये नहीं देखते कितनी है रियाज़त किस की लोग आसान समझ लेते हैं आसानी को
Azhar Faragh
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मुझे लगा था वो टूटे फूलों का ग़म करेगा और उस ने ताज़ा उठा लिए हैं ख़राब रख कर
Azhar Faragh
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