जब तलक है ये ख़ुमार आओ कहीं बैठें छोड़ कर शिकवे हज़ार आओ कहीं बैठें
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आज देखा है तुझ को देर के बा'द आज का दिन गुज़र न जाए कहीं
Nasir Kazmi
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मैं उन्हीं आबादियों में जी रहा होता कहीं तुम अगर हँसते नहीं उस दिन मेरी तक़दीर पर
Zia Mazkoor
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फोन भी आया तो शिकवे के लिए फूल भी भेजा तो मुरझाया हुआ रास्ते की मुश्किलें तो जान लूँ आता होगा उस का ठुकराया हुआ
Balmohan Pandey
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दिन में मिल लेते कहीं रात ज़रूरी थी क्या? बेनतीजा ये मुलाक़ात ज़रूरी थी क्या मुझ सेे कहते तो मैं आँखों में बुला लेता तुम्हें भीगने के लिए बरसात ज़रूरी थी क्या
Abrar Kashif
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डर है घर में कैसे बोला जाएगा छोड़ो जो भी होगा देखा जाएगा मैं बस उस का चेहरा पढ़ कर जाऊँगा मेरा पेपर सब सेे अच्छा जाएगा
Vishal Singh Tabish
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ज़हर पीने से क्या होता है ‘अभी’ मर तो लोग इश्क़ में भी जाते हैं
Abhishek Bhadauria 'Abhi'
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मेरे कमरे में मैं नहीं रहता मेरे कमरे में धुआँ रहता है
Abhishek Bhadauria 'Abhi'
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तुम अगर छोड़ कर नहीं जाते हम भी मुँह मोड़ कर नहीं जाते
Abhishek Bhadauria 'Abhi'
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क्या क्या वो इंसान बताया करता था हम को वो अनजान बताया करता था
Abhishek Bhadauria 'Abhi'
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इक मुद्दत से इस दिल में एक बे-दर्दी का आलम है जाने कैसी रंजिश है ये जाने ये कैसा ग़म है
Abhishek Bhadauria 'Abhi'
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