ज़ख़्म-ए-इश्क़ था वैसे ही भर जाता इक दिन वक़्त के साथ यार सुख़न के टाँकों ने तो नासूर कर दिया इस को
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तुम बहुत ख़ुश रहोगी मेरे साथ वैसे हर इक की अपनी मर्ज़ी है
Tehzeeb Hafi
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रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है
Tehzeeb Hafi
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मैं ने उस सेे प्यार किया है मिल्किय्यत का दावा नइँ वो जिस के भी साथ है मैं उस को भी अपना मानता हूँ
Ali Zaryoun
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आज का दिन भी ऐश से गुज़रा सर से पाँव तक बदन सलामत है
Jaun Elia
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मुझे आज़ाद कर दो एक दिन सब सच बता कर तुम्हारे और उस के दरमियाँ क्या चल रहा है
Tehzeeb Hafi
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ज़ख़्म बस भरने ही वाले थे मेरे एक ख़त फिर मिल गया उस का मुझे
Yuvraj Singh Faujdar
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कर के वा'दा मुकर गया है कोई इश्क़ करने से डर गया है कोई लाश की बू सी आती है हर रोज़ लगता है मुझ में मर गया है कोई
Yuvraj Singh Faujdar
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वो अपने हिस्से की मोहब्बत पहले ही कर चुकी किसी के साथ हम को तो बस अपना दर्द - ए - दिल बतलाने के लिए रक्खा है
Yuvraj Singh Faujdar
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उसे अपना बनाने में ये दिक़्क़त है मेरी ग़ज़लें ये जादू कर न पाएँगी
Yuvraj Singh Faujdar
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ये इश्क़ का जो खेल है रस्सा-कशी का खेल है जितने भी गिरने वाले हैं सब जीते माने जाते हैं
Yuvraj Singh Faujdar
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