जलती उदास आँखों में पिघली नमी हूँ मैं या'नी के सूनी रातों में तेरी कमी हूँ मैं
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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लाश बिस्तर से देखती है उसे रूह लटकी हुई है पंखे पर
Firdous khan
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ज़ख़्म खाते खाते छोड़ा साथ दम ने माज़रत इश्क़ करने की ख़ता कर ली थी हम ने माज़रत सर पटक कर चीख़ता है दर्द मेरा हर घड़ी देख मुझ को कह दिया है ख़ुद ही ग़म ने माज़रत
Firdous khan
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साॅरी उस ने मुझे कहा है फिर या'नी अब कुछ तो हादसा है फिर
Firdous khan
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कितना मुश्किल है ना हर साल सफ़र पर होना संग-ए-मील आख़िरी बन जाना दिसम्बर होना
Firdous khan
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तुम्हारे क़दमों को जब चूमती हूँ लगता है ऐसा कोई जोगन किसी दरगाह की चौखट को चू में है
Firdous khan
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