जो बहू बन के आएगी, ससुराल से लाल सिंदूर, चूड़ी, महावर गया
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खँगालने हैं मुझे अपने सब से अच्छे शे'र जो तुझ को रंग दे ऐसा गुलाल ढूँढ़ना है
Amulya Mishra
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नींद आएगी भला कैसे उसे शाम के बा'द रोटियाँ भी न मुयस्सर हों जिसे काम के बा'द
Azhar Iqbal
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आ रही है जो बहू सीधी रहे माँ चाहती जा रही बेटी मगर चालाक होनी चाहिए
Tanoj Dadhich
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भुला दिया है जो तू ने तो कुछ मलाल नहीं कई दिनों से मुझे भी तिरा ख़याल नहीं
Navin C. Chaturvedi
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इश्क़ के रंग में ऐ मेरे यार रंग आया फिर आज रंगों का तेहवार रंग हो गुलाबी या हो लाल पीला हरा आ लगा दूँ तुझे भी मैं दो चार रंग
Afzal Ali Afzal
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वो उधर फूलों की सेज पर है ज़िन्दगी आख़िरी स्टेज पर है बात जो सखियाँ करवा रही थीं उन का भी फोन इंगेज पर है
Sachin Sharma
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वो किस को चाहती है और किस सेे प्रेम करती है मुहब्बत में कोई तुक्का कभी आसाँ नहीं होता
Sachin Sharma
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मुझ पर लिखेगा तो हो जाएगा तू भी बदनाम, यार बेहतर है आदत डाल ले अब तू भी ग़ज़लें कहने की
Sachin Sharma
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राम मय हो गया नगर देखो सज रही फूलों से डगर देखो राम तो सब के हो ही जाते है राम के हो के तुम अगर देखो
Sachin Sharma
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शे'र कहने के न चक्कर में पड़े कुछ नहीं होगा यूँँ बिस्तर में पड़े हो के ग़ुस्से में पिताजी ने कहा तोड़ते हो रोटियाँ घर में पड़े
Sachin Sharma
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