जो मुमकिन हो तो सीने में बसा लो ये दिल भी आशियाना चाहता है
Related Sher
कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
521 likes
हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
489 likes
बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
325 likes
शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
435 likes
तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
401 likes
More from Dharamraj deshraj
लोग भूलेंगे मुहब्बत जिस दिन बस उसी रोज़ क़यामत होगी
Dharamraj deshraj
1 likes
ज़िन्दगी तू आज़माना छोड़ दे मौत से कह दे बहाना छोड़ दे फूँकने के काम वो आता मकाँ जब परिंदा आशियाना छोड़ दे यार क़िस्मत से भी भागा है कोई बे-सबब आँसू बहाना छोड़ दे छोड़ दूँ उस की गली उस का नगर वो मिरे ख़्वाबों में आना छोड़ दे यार तू माता-पिता को रब समझ हर कहीं भी सर झुकाना छोड़ दे फूल के बदले जहाँ काँटे मिलें ऐसे तू रिश्ते निभाना छोड़ दे चाँद पाने के लिए नादाँ 'धरम' हो सके तो कसमसाना छोड़ दे
Dharamraj deshraj
1 likes
वक़्त के बन ग़ुलाम हम सारे नक़्शे-पा अपने छोड़ जाते हैं
Dharamraj deshraj
2 likes
मेरा मासूम बचपन था भूखा बहुत लोरियां माँ सुनाती रही रात भर
Dharamraj deshraj
4 likes
ऐ चाँद बादलों से निकल आ तो सामने लेंगे हज़ार मर्तबा बोसे नज़र से हम
Dharamraj deshraj
3 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Dharamraj deshraj.
Similar Moods
More moods that pair well with Dharamraj deshraj's sher.







