कहाँ हैं अब वो हवाएँ जो अब के बारिश भी बरस तो जाती है लेकिन वो बू नहीं आती
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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हम मुनाफ़िक़ की किसी बात में आएँगे नहीं चाहे तन्हा रहें जज़्बात में आएँगे नहीं ज़र्फ़ वाले हैं मुहब्बत है हमारा पेशा या'नी कुछ भी हो ख़ुराफ़ात में आएँगे नहीं
Hameed Sarwar Bahraichi
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मैं कभी कहता नहीं तुम सेे मगर तुम ने पूछा भी नहीं दर्द-ए-जिगर
Hameed Sarwar Bahraichi
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ज़िंदगी अब मज़ा नहीं देती काश कोई तो हम सफ़र होता चोट लगती तो हम संभल जाते काश ऐसा भी कुछ हुनर होता
Hameed Sarwar Bahraichi
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कुछ बचा ही नहीं शिकायत में साँस खलने लगी है फ़ुरक़त में तंज़ करते हैं उन की बातों पर बा'द रोते हैं हम नदामत में
Hameed Sarwar Bahraichi
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ये सोच कर किसी मजनूँ ने हाथ काटे हैं वो हाथ रख दे किसी ज़ख़्म पर तो शादाबी
Hameed Sarwar Bahraichi
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