ख़ामख़ाँ बेवजह और क्या बोलना बोलते बोलते ही गुज़ारी ये उम्र
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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याद में रख लिया तवाईफ़ को रात में फिर से सो गया जल्दी
Aashish kargeti 'Kash'
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वो मुझ से दूर जाने को मुसलसल दर बदलता है कभी घर का पता अपना कभी नंबर बदलता है
Aashish kargeti 'Kash'
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क्यूँ परेशाँ है मुश्किलों से तू प्रेत भी देव को दिखा करते
Aashish kargeti 'Kash'
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मुझे भी बताओ कि क्या है अभी भी अगर कुछ बचा है
Aashish kargeti 'Kash'
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के सब है सुनाया पुराना ये इक शे'र मेरा नया है
Aashish kargeti 'Kash'
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