ख़ुद-ब-ख़ुद मंज़िल तिरे क़दमों में चल कर आएगी हौसला तेरा अगर शम्स-ओ-क़मर तक जाएगा
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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पानी भी है, माहौल भी है, और हवा भी क्या बात कि सर सब्ज़ शजर सूख रहा है
Dard Faiz Khan
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ज़मीं की बात और न आसमाँ की बात करते हैं जहाँ हमारी फ़िक्र है वहाँ की बात करते हैं जहाँ गरीब को मिले न रोटी एक वक़्त की चलो अमीर ज़ादों हम वहाँ की बात करते हैं
Dard Faiz Khan
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एक लम्हे को गुज़रने में लगी हैं सदियाँ जब किसी क़ैस को लैला से जुदा होना पड़ा
Dard Faiz Khan
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जान-ए-मन तुम वबाल करती हो लाल में भी कमाल करती हो जब पहन लेती लाल जोड़ा तुम फिर तो जीना मुहाल करती हो
Dard Faiz Khan
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नींद आती नहीं है फ़ुर्क़त में मेरी पलकें झुलस गई यारो
Dard Faiz Khan
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