ख़ुद से हो बे-ख़बर दर दर भटकते हैं ऐसे फ़कीर हम जो घर भटकते हैं ख़ुद से मिला करो कोई बहाने से ख़ुद-आगही के कारण डर भटकते हैं
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मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
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बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं प्यार अकेला जी लेता है दोस्त अकेले मर जाते हैं
Kumar Vishwas
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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मुझ को भी उन्हीं में से कोई एक समझ ले कुछ मसअले होते हैं ना जो हल नहीं होते
Ali Zaryoun
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तजरबा बस तुम्हें है जीने का हम ने तो ज़िंदगी गँवाई है दस्त के आप ही मुसाफ़िर हो ख़ाक हम ने कहाँ उड़ाई है
Shubham Rai 'shubh'
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साँस लेने के भी पैसे देने होंगे इस क़दर महँगाई बढ़ती जा रही है
Shubham Rai 'shubh'
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ये लोग पूछेंगे हमें ज़रा ख़राब होने दो अधर से चूम लेंगे बस मियाँ शराब होने दो
Shubham Rai 'shubh'
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बीतता वक़्त इक ख़जाना है क्या नया साल क्या पुराना है
Shubham Rai 'shubh'
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तेरे बा'द चाहेंगी आँखें उसी को खुली आँख से जो न सपने दिखाए
Shubham Rai 'shubh'
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