ख़ुशबू की और रंगों की बस एक ही सूरत जानी है मेहंदी उस के हाथों की और आलता उस के पैरों का
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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इतनी मिलती है मिरी ग़ज़लों से सूरत तेरी लोग तुझ को मिरा महबूब समझते होंगे
Bashir Badr
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उस के हाथों में बस हम ही जँचते थे दावा सोने का कंगन भी करता था
Vishal Bagh
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तुझ को छू कर और किसी की चाह रखें हैरत है और लानत ऐसे हाथों पर
Varun Anand
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लगा जब कि दुनिया की पहली ज़रूरत मोहब्बत है तब उस ने माना यक़ीं हो गया जब मोहब्बत ज़रूरत है तब उस ने माना वगरना तो ये लोग उसे ख़ुद-कुशी के लिए कह चुके थे उसे आइने ने बताया कि वो ख़ूब-सूरत है तब उस ने माना
Vikram Gaur Vairagi
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पहले बेचारी आँखों के निखार उतरते होंगे तब जा कर इन आँखों से त्योहार उतरते होंगे
Aarush Sarkaar
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मत कहो मिरे हमदम ये कि राएगाँ हो तुम इक जहाँ के बंदे का, यार दो जहाँ हो तुम
Aarush Sarkaar
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मर्ज़ी से तो पैमाना, हम ने ना रखा होगा सामने कोई फ़ोटो भी रखी गई होगी
Aarush Sarkaar
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हम बर्बाद हुए हैं तेरी इन आँखों के आगे तुझ को तो मालूम ही होगा कितने अच्छे थे हम
Aarush Sarkaar
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ये निगाहें हैं हमारी हाँ मगर रहते हैं याँ ख़्वाब सारे आप के
Aarush Sarkaar
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