ख़्वाब ही ने जगाए रक्खा है वर्ना आदम तो सो चुका होता
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इश्क़ ने 'ग़ालिब' निकम्मा कर दिया वर्ना हम भी आदमी थे काम के
Mirza Ghalib
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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तरीक़े और भी हैं इस तरह परखा नहीं जाता चराग़ों को हवा के सामने रक्खा नहीं जाता मोहब्बत फ़ैसला करती है पहले चंद लम्हों में जहाँ पर इश्क़ होता है वहाँ सोचा नहीं जाता
Abrar Kashif
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अब मज़ीद उस सेे ये रिश्ता नहीं रक्खा जाता जिस सेे इक शख़्स का पर्दा नहीं रक्खा जाता पढ़ने जाता हूँ तो तस्में नहीं बाँधे जाते घर पलटता हूँ तो बस्ता नहीं रक्खा जाता
Tehzeeb Hafi
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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तभी तो अब के मेरी चाल में रवानी थी कि मैं ने पहले भी रस्ते की ख़ाक छानी थी मुझे तो तैरना था डूबना नहीं था ख़ैर ये बात तब की है जब मछली जल की रानी थी
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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न बंजर देखी जाती है न ज़रख़ेज़ ये जो हम ने ज़मीं छोड़ी हुई है
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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हम ने सहरा के सफ़र को तय किया है साथ में आगे अब जंगल है मेरे साए रुक जा दो घड़ी
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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एक अँधेरे घर में हैं हम जिस का दरीचा कुछ छोटा है
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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अब आ कर क्या ही शाइ'र से सुनोगे तब आते जब वो याद आया हुआ था
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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