न बंजर देखी जाती है न ज़रख़ेज़ ये जो हम ने ज़मीं छोड़ी हुई है
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मेरे नाम से क्या मतलब है तुम्हें मिट जाएगा या रह जाता है जब तुम ने ही साथ नहीं रहना फिर पीछे क्या रह जाता है मेरे पास आने तक और किसी की याद उसे खा जाती है वो मुझ तक कम ही पहुँचता है किसी और जगह रह जाता है
Tehzeeb Hafi
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जो तस्वीरें साथ में खींची जाती हैं वो इक दिन तन्हा महसूस कराती हैं
Vikram Gaur Vairagi
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हार हो जाती है जब मान लिया जाता है जीत तब होती है जब ठान लिया जाता है
Shakeel Azmi
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मिले किसी से गिरे जिस भी जाल पर मेरे दोस्त मैं उस को छोड़ चुका उस के हाल पर मेरे दोस्त ज़मीं पे सबका मुक़द्दर तो मेरे जैसा नहीं किसी के साथ तो होगा वो कॉल पर मेरे दोस्त
Ali Zaryoun
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तू ने देखी है वो पेशानी वो रुख़्सार वो होंठ ज़िंदगी जिन के तसव्वुर में लुटा दी हम ने तुझ पे उठी हैं वो खोई हुई साहिर आँखें तुझ को मालूम है क्यूँ उम्र गँवा दी हम ने
Faiz Ahmad Faiz
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तभी तो अब के मेरी चाल में रवानी थी कि मैं ने पहले भी रस्ते की ख़ाक छानी थी मुझे तो तैरना था डूबना नहीं था ख़ैर ये बात तब की है जब मछली जल की रानी थी
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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ख़्वाब ही ने जगाए रक्खा है वर्ना आदम तो सो चुका होता
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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रात कैसे सोने दे सकती है फिर चाँद को गर दिन-दहाड़े देख लो
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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मेरे यार के सर जंगल का साया है और मैं एक लकड़हारे का बेटा हूँ
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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तुम को पता है क्या होता था रात के होने से पहले शाम की धूप के टुकड़े मेरी आँखों में चुभ जाते थे
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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