तुम को पता है क्या होता था रात के होने से पहले शाम की धूप के टुकड़े मेरी आँखों में चुभ जाते थे
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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तभी तो अब के मेरी चाल में रवानी थी कि मैं ने पहले भी रस्ते की ख़ाक छानी थी मुझे तो तैरना था डूबना नहीं था ख़ैर ये बात तब की है जब मछली जल की रानी थी
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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रात कैसे सोने दे सकती है फिर चाँद को गर दिन-दहाड़े देख लो
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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न बंजर देखी जाती है न ज़रख़ेज़ ये जो हम ने ज़मीं छोड़ी हुई है
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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हम ने सहरा के सफ़र को तय किया है साथ में आगे अब जंगल है मेरे साए रुक जा दो घड़ी
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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तुम्हें मुझ से बिछड़ कर क्या मिला है ख़ुद ही देखो ना तुम अब भी पहले से ना-ख़ुश हो और मुझ से जुदा भी हो
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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