रात कैसे सोने दे सकती है फिर चाँद को गर दिन-दहाड़े देख लो
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है
Tehzeeb Hafi
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पागल कैसे हो जाते हैं देखो ऐसे हो जाते हैं
Ali Zaryoun
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उस के चेहरे की चमक के सामने सादा लगा आसमाँ पे चाँद पूरा था मगर आधा लगा
Iftikhar Naseem
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तभी तो अब के मेरी चाल में रवानी थी कि मैं ने पहले भी रस्ते की ख़ाक छानी थी मुझे तो तैरना था डूबना नहीं था ख़ैर ये बात तब की है जब मछली जल की रानी थी
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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न बंजर देखी जाती है न ज़रख़ेज़ ये जो हम ने ज़मीं छोड़ी हुई है
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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हम ने सहरा के सफ़र को तय किया है साथ में आगे अब जंगल है मेरे साए रुक जा दो घड़ी
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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ख़्वाब ही ने जगाए रक्खा है वर्ना आदम तो सो चुका होता
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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एक अँधेरे घर में हैं हम जिस का दरीचा कुछ छोटा है
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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