कि अब तो नींद से भी है तमाम सी शिकायतें न जाने बात क्या है जो नज़र में आती ही नहीं
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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ये तो बस मेरा मुक़द्दर नईं सही वरना कोई ऐब नईं “दीवानी“ में
karan singh rajput
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कमज़ोर ना जानो दिए को ऐं - हवाओं इस तरह ख़ामोश हैं तो क्या बग़ावत भी हो सकती है कभी
karan singh rajput
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जब से सुनी है ज़िन्दगी तेरी कहानी ये मैं ने तब से मुझे अच्छी नहीं लगती कहानी कोई भी
karan singh rajput
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वही गुज़रेगी आख़िर में 'करन' मुझ पर जो गुज़री आज तक हर एक आशिक़ पे
karan singh rajput
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कह दिया तू ने तो, मेरी याद में रोना नहीं पर जो तुझ को भूल ही ना पाए फिर वो क्या करे
karan singh rajput
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