किसी बाज़ार से जो मिल जाता अपना बचपन ख़रीद लाते फिर
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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ये दर्द के टुकड़े हैँ अश'आर नहीं अज़रा हम लफ़्ज़ों के धागों में ज़ख़्मों को पिरोते हैँ
Binte Reshma
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तुझ को पाकर भी कुछ नहीं पाया तेरे हो के भी बे-सहारे हैं
Binte Reshma
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हार जाने पे लोग कहते हैं कौन झगड़ा करे मुक़द्दर से
Binte Reshma
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राब्ते ख़त्म कर लिए सब सेे अब मुझे अपने साथ रहना है
Binte Reshma
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आँखों को अब समझाना होगा ख़्वाबों की तकमील नहीं होती
Binte Reshma
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