किताबों से निकल कर तितलियाँ ग़ज़लें सुनाती हैं टिफ़िन रखती है मेरी माँ तो बस्ता मुस्कुराता है
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है
Tehzeeb Hafi
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बिछड़ जाएँगे हम दोनों ज़मीं पर ये उस ने आसमाँ पर लिख दिया है
Siraj Faisal Khan
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उस के दिल की आग ठंडी पड़ गई मुझ को शोहरत मिल गई इल्ज़ाम से
Siraj Faisal Khan
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जहान वालों से कह दो यहाँ से हट जाएँ ख़ुदा के और मेरे दरमियाँ से हट जाएँ
Siraj Faisal Khan
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वो कभी आग़ाज़ कर सकते नहीं ख़ौफ़ लगता है जिन्हें अंजाम से
Siraj Faisal Khan
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तिरे एहसास में डूबा हुआ मैं कभी सहरा कभी दरिया हुआ मैं
Siraj Faisal Khan
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