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कितनी उजलत में दुनिया बनाई ख़ुदा कितने बच्चों को दुख मारे गुब्बारे हैं

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रस्सी चाक़ू कहते मुझ को अक्सर बेहतर होगा ग़लत क़दम उट्ठा ले

Jagveer Singh

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यारों नेताओं की बेटी है ये मुहब्बत सारी क़स में झूठी सारे वादे झूठे यार बिना आधी दुनिया लक़वा लगती है जग रूठे तो रूठे जिगरी यार न रूठे

Jagveer Singh

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ज़बरदस्ती पकड़े हुए हैं तू और मैं कि चल छोड़ देते हैं अब ये मोहब्बत

Jagveer Singh

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वही हुआ है जो होना तय था जो तय है आगे वही होना ये मसअला क्यूँँ भला जो तय है वही हुआ उस पे क्या रोना अगर है बस में जो सब ख़ुदा के तो उस के बंदों तुम्हें क्या फ़िक्र हैं रिंद हम होना है जो भी गर हमारा हम से ही वो होना

Jagveer Singh

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ऐसी ग़रीबी देखी है बिन सब्ज़ी रोटी खाई है और क्या बुरा हो सकता है हम ने ग़ज़ल तक बेची है

Jagveer Singh

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