कुछ इस लिए भी कि शर्मिन्दगी न हो तुम को मैं अंजुमन में मिला तुम सेे अजनबी की तरह
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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ये मानो या न मानो तुम मगर सच है यही देखो बिना मेरे तुम्हारा नाम तक पूरा नहीं होता
Rehaan
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दुआ में तुम जिसे माँगो वही फ़रहाद होना था सनम को रब समझकर इश्क़ में प्रहलाद होना था सरल शब्दों में बोलूँ तो अलग दोनों में था बस ये तुम्हें आबाद दिखना था मुझे बर्बाद होना था
Rehaan
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चॉकलेट तो क़ुबूल है तुम्हारा पर सुनो ये नुमाइशें न ला सकेंगी रिश्तों में मिठास
Rehaan
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क़ुबूल है मुझे इज़हार जो किया उस ने है शर्त बस कि न पूछे अतीत वो मेरा
Rehaan
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तेरी ही धड़कनों को दिल में जाँ बाशिन्दा रक्खा है बनाया था तेरा जो अक्स वो ताबिन्दा रक्खा है ये ग़म तुझ सेे बिछड़ने का किसी मातम सा लगता है मगर ये ग़म ही है जिस ने कि अब तक ज़िन्दा रक्खा है
Rehaan
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