क़ुदरत अचानक क्यूँ हसीं लगने लगी ये इक नई मुस्कान उल्फ़त तो नहीं
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रौशनी बढ़ने लगी है शहर की चाँद छत पर आ गया है देखिए
Divy Kamaldhwaj
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भूलभुलैया था उन ज़ुल्फ़ों में लेकिन हम को उस में अपनी राहें दिखती थीं आप की आँखों को देखा तो इल्म हुआ क्यूँँ अर्जुन को केवल आँखें दिखती थीं
Ashraf Jahangeer
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ये क्या कि जब भी मिलो पूछ के बता के मिलो कभी करो मुझे हैरान अचानक आ के मिलो
Rehman Faris
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तन्हाई ये तंज करे है तन्हा क्यूँ है यार कहाँ है आगे पीछे चलने वाले
Vishal Singh Tabish
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क्यूँ लिखूँ ज़ुल्फ़-ओ-लब-ओ-रुख़सार पे नग़्में बहुत प्यार की पहली नज़र रुस्वाइयाँ ही क्यूँ लिखूँ
nakul kumar
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वो माँगते हम सेे हमारी ज़िंदगी हम तब थमा देते हमारी वो क़लम
Hemant Sakunde
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उस फूल से ख़ुशबू चुरा लूँ मैं अगर दो चार काँटे भी चुभे तो डर नहीं
Hemant Sakunde
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तेरा दीदार करना हो हमें तो कैसे मुमकिन हो भले हो साथ तस्वीर-ए-ख़याली तेरी लेकिन हो अधर यूँँ मौन रख कर बस हमें सुनती रहोगी क्या कभी तस्वीर हाल-ए-दिल कहे ऐसा भी इक दिन हो
Hemant Sakunde
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सोचता हूँ छोड़ दूँ अब शे'र कहना सोच कर इक शे'र कैसे चुप रहूँ मैं
Hemant Sakunde
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सब राज करना चाहते जिस क़ल्ब पर उस पर सियासत तो हमारी ही रही
Hemant Sakunde
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