क्यूँ ना पिंजरे में मैं रहूँ बोलो? अच्छी लगतीं हैं बेड़ियां मुझ को
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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फूल बागों में ही खिलते हैं दोस्त ये दिलों में खिला नहीं करते
Abhishek Bhadauria 'Abhi'
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फिर वहीं देखो ‘अभी’ लाया है ये नसीब छोड़ कर हम को जहाँ क़िस्मत गई थी
Abhishek Bhadauria 'Abhi'
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जिस के हाथों में रेखाएँ हो क़िस्मत की वो क़िस्मत का मारा कैसे हो सकता है
Abhishek Bhadauria 'Abhi'
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ज़हर पीने से क्या होता है ‘अभी’ मर तो लोग इश्क़ में भी जाते हैं
Abhishek Bhadauria 'Abhi'
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जब तलक है ये ख़ुमार आओ कहीं बैठें छोड़ कर शिकवे हज़ार आओ कहीं बैठें
Abhishek Bhadauria 'Abhi'
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