kyun chalte chalte ruk gae viran rasto tanha hun aaj main zara ghar tak to sath do
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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तू ने देखी है वो पेशानी वो रुख़्सार वो होंठ ज़िंदगी जिन के तसव्वुर में लुटा दी हम ने तुझ पे उठी हैं वो खोई हुई साहिर आँखें तुझ को मालूम है क्यूँ उम्र गँवा दी हम ने
Faiz Ahmad Faiz
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सुब्ह-ए-मग़रूर को वो शाम भी कर देता है शोहरतें छीन के गुमनाम भी कर देता है वक़्त से आँख मिलाने की हिमाकत न करो वक़्त इंसान को नीलाम भी कर देता है
Nadeem Farrukh
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सर्दी और गर्मी के उज़्र नहीं चलते मौसम देख के साहब इश्क़ नहीं होता
Moin Shadab
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मेरी क़िस्मत कि ये दुनिया मुझे पहचानती है लोग मर जाते हैं पहचान बनाने के लिए
Nadeem Farrukh
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ख़्वाहिश सुखाने रक्खी थी कोठे पे दोपहर अब शाम हो चली मियाँ देखो किधर गई
Adil Mansuri
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तू किस के कमरे में थी मैं तेरे कमरे में था
Adil Mansuri
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मुझे पसंद नहीं ऐसे कारोबार में हूँ ये जब्र है कि मैं ख़ुद अपने इख़्तियार में हूँ
Adil Mansuri
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दरिया के किनारे पे मिरी लाश पड़ी थी और पानी की तह में वो मुझे ढूँड रहा था
Adil Mansuri
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तुम को दावा है सुख़न-फ़हमी का जाओ 'ग़ालिब' के तरफ़-दार बनो
Adil Mansuri
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