लहरें डूबो रही हैं मुसलसल ही कश्तियाँ क्या अपनी इंकिसारी समुंदर ने दी भुला
Related Sher
कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
521 likes
ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
484 likes
उस की तस्वीरें हैं दिलकश तो होंगी जैसी दीवारें हैं वैसा साया है एक मैं हूँ जो तेरे क़त्ल की कोशिश में था एक तू है जो जेल में खाना लाया है
Tehzeeb Hafi
192 likes
मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
388 likes
हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
373 likes
More from Wasif Quazi
वो समझते हैं जिस को दिल मेरा उन की यादों की क़ब्रगाह है वो
Wasif Quazi
0 likes
उन पे कुछ शे'र जब कहे मैं ने मेरी ग़ज़लों में जान तब आई
Wasif Quazi
0 likes
राब्ता नींद का रातों से सँवर जाएगा ख़्वाब उन का मेरी आँखों में उतर जाएगा
Wasif Quazi
0 likes
ज़िंदा रखने को ख़्वाहिशें उन की दफ़्न सब अपनी हसरतें कर दीं
Wasif Quazi
0 likes
ख़ुदा की इबादत में मशग़ूल हैं वो जो माँ बाप की फ़िक्र करते नहीं हैं
Wasif Quazi
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Wasif Quazi.
Similar Moods
More moods that pair well with Wasif Quazi's sher.







