log dete rahe kya kya na dilase mujh ko zakhm gahra hi sahi zakhm hai bhar jaega
Related Sher
ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
471 likes
ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
484 likes
ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
508 likes
तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
401 likes
तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
1279 likes
More from Shakeb Jalali
यही दीवार-ए-जुदाई है ज़माने वालो हर घड़ी कोई मुक़ाबिल में खड़ा रहता है
Shakeb Jalali
7 likes
दिल के वीराने में इक फूल खिला रहता है कोई मौसम हो मिरा ज़ख़्म हरा रहता है
Shakeb Jalali
9 likes
सोचो तो सिलवटों से भरी है तमाम रूह देखो तो इक शिकन भी नहीं है लिबास में
Shakeb Jalali
10 likes
दिल सा अनमोल रतन कौन ख़रीदेगा 'शकेब' जब बिकेगा तो ये बे-दाम ही बिक जाएगा
Shakeb Jalali
7 likes
भीगी हुई इक शाम की दहलीज़ पे बैठे हम दिल के सुलगने का सबब सोच रहे हैं
Shakeb Jalali
19 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Shakeb Jalali.
Similar Moods
More moods that pair well with Shakeb Jalali's sher.







