मंज़िलों की प्यास है ये ज़िंदगी तेरी मेरी आस है ये ज़िंदगी इस सफ़र में ख़ार भी हैं गुल के साथ फिर भी कितनी ख़ास है ये ज़िंदगी
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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गले मिलना न मिलना तो तेरी मर्ज़ी है लेकिन तेरे चेहरे से लगता है तेरा दिल कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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मेरे होंटों पे अपनी प्यास रख दो और फिर सोचो कि इस के बा'द भी दुनिया में कुछ पाना ज़रूरी है
Waseem Barelvi
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मेरी तन्हाई देखेंगे तो हैरत ही करेंगे लोग मोहब्बत छोड़ देंगे या मोहब्बत ही करेंगे लोग
Ismail Raaz
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कहाँ ऐसे मरासिम थे कि कोई लौट के आता ख़िज़ाँ के फूल को ख़ूँ की नहीं अश्कों की हाजत थी
Sanjay Bhat
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वो दिल से हो कर आँख से उतर गया इक आँसू था जो उम्र से गुज़र गया
Sanjay Bhat
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वो ही चेहरा वो ही आँखें वो ही दस्त-ओ-बाज़ू दर-ओ-दीवार न बदली न ही वो घर मेरा
Sanjay Bhat
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वक़्त के तख़्त पर हम बिछे इस तरह ख़्वाब जो देखे थे ख़्वाब ही रह गए इन तरसती निगाहों में दिखता ही क्या आब-ए-ग़म बन के हम आँख से बह गए
Sanjay Bhat
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ये किस तरह की मय-कशी है कौन सा इलाज है तुम्हें दवा भी चाहिए तो ज़हर के लिबास में
Sanjay Bhat
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