मेरी अपनी कहानी है मेरे अपने क़िस्से हैं दर्द नहीं इक जैसा है उस के भी कई हिस्से हैं
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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तुम बहुत ख़ुश रहोगी मेरे साथ वैसे हर इक की अपनी मर्ज़ी है
Tehzeeb Hafi
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ये दुनिया कितनी प्यारी है इस में ही दुनिया सारी है जीता है उस ने कितना कुछ इक शर्त अभी भी हारी है
Kumar Prem Pinaki
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पहले हिम्मत बाँधी फिर हिम्मत से दो चार किया क़िस्मत की ऑंधी आई हार नहीं स्वीकार किया
Kumar Prem Pinaki
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टूटे हुए को ही यहाँ जुड़ने की चाहत होती है सागर को मिलने में ही कब दरिया की आदत होती है
Kumar Prem Pinaki
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इस दुनिया में जीते जी सारी दुनिया हारी है इक फाॅंसी के फंदे ने कितनी लाश सॅंभाली है
Kumar Prem Pinaki
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जब शीश कटे फिर धड़ ये लड़े लड़ते रहे उन हैवानों से बाज़ी क्यूँ फिर हारी हम ने ये पूछो तुम ग़द्दारों से
Kumar Prem Pinaki
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