मिन्नतें करता था रुक जाओ मेरा कोई नहीं मेरे रोके से मगर कौन रुका कोई नहीं बेवफ़ाई को बड़ा जुर्म बताने वाले याद है तू ने भी चल छोड़ हटा कोई नहीं
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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न करो बहस हार जाओगी हुस्न इतनी बड़ी दलील नहीं
Jaun Elia
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दिल से साबित करो कि ज़िंदा हो साँस लेना कोई सुबूत नहीं
Fahmi Badayuni
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उस से कहना था के वो कितना ज़रूरी है मुझे आ रहा हूँ अभी जिस शख़्स से झगड़ा कर के
Khan Janbaz
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अल्लाह बना दे मिरे अश्कों को कबूतर सब पूछ रहे हैं तिरे रूमाल में क्या है
Khan Janbaz
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इक ज़रा बात पर अपने से पराए हुए लोग हाए वो ख़ून पसीने से कमाए हुए लोग
Khan Janbaz
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बच गया है जो तेरा थोड़ा सा हिस्सा मुझ में अब तलक मुझ को किसी का नहीं होने देता
Khan Janbaz
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इश्क़ भी अपनी ही शर्तों पे किया है मैं ने ख़ुद को बेचा नहीं बाज़ार में सस्ता कर के उस से कहना था के वो कितना ज़रूरी है मुझे आ रहा हूँ अभी जिस शख़्स से झगड़ा कर के
Khan Janbaz
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