sherKuch Alfaaz

मुफ़्लिसी है भूख है मैं खा न जाऊँ यार को प्यार की बातें अभी मेरे लिए बकवास हैं

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हर बार मुझे हर साँस मिरी इक बात यही समझाती है कुछ काम करो कुछ नाम करो ये उम्र निकलती जाती है मैं कहता हूँ कि समझो तो कोई बात नहीं ऐसी लेकिन इस दुनिया में शोहरत की हवस मुझे अंदर से खा जाती है

nakul kumar

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तेरे जाने के बा'द ये मुझे महसूस हुआ है तेरे आने के बा'द भी बहारें आ नहीं सकतीं

nakul kumar

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कुछ देखता भी है नहीं बाग़-ए-बहार में जो हारता है ज़िन्दगी हर बार प्यार में कह कर गई है कपड़े सुखा दूँ तो बात हो दिन हो गए है सात मैं हूँ इंतिज़ार में

nakul kumar

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तन्हा रहता हूँ अक्सर ही हर एक का फिर हो जाता हूँ हो जाता हूँ जैसे दुनिया फिर ख़ुद में ही खो जाता हूँ चुप-चाप पड़ा हूँ कोने में ग़म दर्द जुदाई साथ लिए जब नींद कभी आ जाए तो ख़्वाबों को बिछा सो जाता हूँ

nakul kumar

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कब ये ग़म मिरे सर से उतारे जाऍंगे ये जाऍंगे तो किस के सहारे जाऍंगे मरने के लिए चाहिए बस इक तेरी नज़र आज अगर न मरे तो मारे जाऍंगे

nakul kumar

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