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मुस्कुरा कर गुज़र गया कोई मुझ पे जादू सा कर गया कोई पहले तन्हाइयों से डरता था अब ज़माने से डर गया कोई

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वो मुहब्बत का तलबगार नहीं हो सकता जो सितमगर है उसे प्यार नहीं हो सकता तेरे होते हुए जो चाँद का दीदार करे कुछ भी होगा वो समझदार नहीं हो सकता

Zeeshan kaavish

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वो ही मुझ को गिराने वाला है जिस को गिरते हुए सँभाला है दिल को पत्थर बनाया था मैं ने उस ने पत्थर भी तोड़ डाला है

Zeeshan kaavish

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कभी फूलों से कहता है कभी भॅवरों से कहता है कभी ये दिल मेरा चुप चाप ही हर दर्द सहता है यक़ीं मानो मैं अपना राज़ ए दिल तुम को बताता हूँ जो मेरे दिल का दुश्मन है वो मेरे दिल में रहता है

Zeeshan kaavish

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तुझे ख़बर भी है ऐ बे-वफ़ा हज़ारों ने हयात काट दी रो रो के ग़म के मारों ने मिलूँ मैं चाँद से अपने तो किस तरह से मिलूँ फ़लक को घेर लिया है कई सितारों ने

Zeeshan kaavish

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उन की आँखों से जब से पी यारो छोड़ दी तब से मय-कशी यारो रात को छत से चाँद जब देखा याद उन की फिर आ गई यारो

Zeeshan kaavish

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