न जाने भेस में वो किस के डस ले वो नागिन इच्छाधारी हो गई है
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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यूँँ भी हक़ मुझ पे तेरा बनता है मुझ से जो उम्र में बड़ी है तू
Meem Maroof Ashraf
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कुछ भी हमारे साथ में अच्छा नहीं हुआ या'नी बुरा हुआ है ज़्यादा नहीं हुआ
Meem Maroof Ashraf
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फट जाएगा ऐसे तो हमारा जिगर 'अशरफ़' यक-दम न करे हम से किनारा उसे कहना
Meem Maroof Ashraf
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फिर भी उफ़ तक न कहा हम ने उसे वरना क्या कुछ न हमें उस ने कहा
Meem Maroof Ashraf
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उस को लगती है हँसी झूटी हँसी खा गई मुझ को मिरी झूटी हँसी
Meem Maroof Ashraf
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