फट जाएगा ऐसे तो हमारा जिगर 'अशरफ़' यक-दम न करे हम से किनारा उसे कहना
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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तुम पूछो और मैं न बताऊँ ऐसे तो हालात नहीं एक ज़रा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं
Qateel Shifai
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मेरे नाम से क्या मतलब है तुम्हें मिट जाएगा या रह जाता है जब तुम ने ही साथ नहीं रहना फिर पीछे क्या रह जाता है मेरे पास आने तक और किसी की याद उसे खा जाती है वो मुझ तक कम ही पहुँचता है किसी और जगह रह जाता है
Tehzeeb Hafi
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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सौ सौ उमीदें बँधती है इक इक निगाह पर मुझ को न ऐसे प्यार से देखा करे कोई
Allama Iqbal
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यूँँ भी हक़ मुझ पे तेरा बनता है मुझ से जो उम्र में बड़ी है तू
Meem Maroof Ashraf
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न जाने भेस में वो किस के डस ले वो नागिन इच्छाधारी हो गई है
Meem Maroof Ashraf
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मुश्किल हुआ जाता है बहुत रह नहीं पाते अब दर्द-ए-जुदाई को पिया सह नहीं पाते हम साथ तसव्वुर में तिरे क्या नहीं करते हाँ वो भी सभी कुछ जो कभी कह नहीं पाते
Meem Maroof Ashraf
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मैं चाहता था बस कि मिरे साथ तू रहे क्या तुझ से और जान मिरी चाहता था मैं
Meem Maroof Ashraf
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जब भी चूमा है तेरे होंटों को जिस्म से इन को जुदा जाना है
Meem Maroof Ashraf
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