न हारा है इश्क़ और न दुनिया थकी है दिया जल रहा है हवा चल रही है
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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इलाही मिरे दोस्त हों ख़ैरियत से ये क्यूँँ घर में पत्थर नहीं आ रहे हैं
Khumar Barabankvi
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दूसरों पर अगर तब्सिरा कीजिए सामने आइना रख लिया कीजिए
Khumar Barabankvi
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हटाए थे जो राह से दोस्तों की वो पत्थर मेरे घर में आने लगे हैं
Khumar Barabankvi
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हुस्न जब मेहरबाँ हो तो क्या कीजिए इश्क़ के मग़्फ़िरत की दुआ कीजिए
Khumar Barabankvi
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वही फिर मुझे याद आने लगे हैं जिन्हें भूलने में ज़माने लगे हैं
Khumar Barabankvi
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