नहीं होते जुदा ऐसे कभी दो लोग दुनिया में मियाँ आपस में दोनों का ख़फ़ा होना ज़रूरी है पुराने जब तलक बनकर रहोगे याद आएगी ज़माने की तरह तुम को नया होना ज़रूरी है
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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सफल केवल समझता हूँ उसी को खिला दे रोटियाँ जो हर किसी को समझ में ये नहीं आता मुझे बस ख़ुदा ने क्यूँँ बनाया बेबसी को
Kush Pandey ' Saarang '
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जिस्म की हसरत मिट्टी में मिल जाएगी प्यार करोगे जिस दिन साहब दिल से तुम
Kush Pandey ' Saarang '
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ज़बाँ में चाशनी रखने लगे हम यही दस्तूर है दुनिया का साहब
Kush Pandey ' Saarang '
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यहाँ सब मंज़िलों की दौड़ में हैं नहीं मालूम कब तक दौड़ना है
Kush Pandey ' Saarang '
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जो खा़लिस इश्क़ करते हैं जहाँ में उन्हें अक़्सर ही छोड़ा जा रहा है हमीं पत्थर को पूजे जा रहें हैं हमारा दिल ही तोड़ा जा रहा है
Kush Pandey ' Saarang '
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