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नहीं है चाह जिस्मों की न दौलत चाहिए तेरी मिले दिल में जगह तेरे वहीं दुनिया बसा लूँगा

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ये अमीरी इश्क़ पर भारी हुई जब से सो लगा है जिस्म का बाज़ार कमरे में

Jitendra "jeet"

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वो मैं था जो उस की हर हाँ में शामिल नइँ था बस इस कारण ही तो मैं उस के क़ाबिल नइँ था उस दिल के दफ़्तर में मिल तो जाता काम मुझे हाँ पास मेरे रिश्वत में देने को दिल नइँ था

Jitendra "jeet"

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मैं तो अब शाम का ढलते सूरज सा हूँ तुम मेरी ज़िन्दगी का उजाला बनो मैं इबादत करूँँ हर घड़ी हर पहर तुम मेरी बंदगी तुम शिवाला बनो

Jitendra "jeet"

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राह में तेरी मैं कोई बाधा नहीं पर तेरा दिल दुखे ये इरादा नहीं मेरे हिस्से नहीं आएँगी रुक्मिणी मेरे हिस्से में जब कोई राधा नहीं

Jitendra "jeet"

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जानते हो कि तुम ज़िन्दगी हो मेरी तुम ग़ज़ल गीत और शा'इरी हो मेरी वक़्त रहते उठा लीजिए फोन को क्या पता कॉल ये आख़िरी हो मेरी

Jitendra "jeet"

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